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  • कैसे करें पापों का नाश (पापनाशिनी द्वादशी) :

    फाल्गुनी मास शुक्ला पक्ष एकादशी प्रातः दैनिक कार्य से निवृत हो के स्नानआदि करने के पश्चात हाथ मे जल लेकर सच्ची श्रधा के साथ 108 बार मन्त्र का ऊचरन करें :-                     द्वादशयाम् तु निराहार: स्थित्वहमपरेअहनी |                     भोक्शयामी जामदग्न्येश शरणं मे भ्वाच्युत||    &n ...

  • Mahashivratri – The Greatest Celebration for Lord Shiva Devotees

      Mahashivratri is Lord Shiva's most beloved day of the year Without a doubt, the sacred event of Maha Shivratri stays a standout amongst the most significant celebrations for every one of the devotees of Lord Shiva. It is trusted that whoever reveres Lord Shiva on this blessed day with complete severity and commitment is mitigated of all transgressions and accomplishes freedom or moksha. In Hindu mythology, Kaal ratri, Mohratri and Shivaratri are viewed as the three most auspicious days ...

  • माँ महागौरी - माँ दुर्गा का आठवां सवरूप

    माँ महागौरी - माँ दुर्गा का आठवां सवरूप माँ महागौरी - माँ दुर्गा का आठवां सवरूप है जो की सुख, शांति, धन, वैभव की प्रतीक मानी जाती है |  नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है क्योंकि मां की उत्पत्ति के समय इनकी आयु आठ वर्ष की थी जिस कारण इनका पूजन अष्टमी को कि जाती  है। कहते हे अगर सच्चे तन ओर मन से अगर मां की स्तुति की जाये तो समस्त पापों का नाश होता है तथा सुख, शांति, धन, वैभव  प्राप्ति  होती है । माँ  दुर्गा  के आठवें स्वरूप महागौरी माँ का प्रसिद्ध ...

  • नवरात्रि के सातवें दिन : कालरात्रि - माँ दुर्गा का सातवां सवरूप

    या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।                                                                       ...

  • श्राद्व क्या है? क्यूों किया जाता है ?

    गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा मृत्यु के तेरह दिन बाद यमलोक के लिए अपनी यात्रा शुरू होती है और यह वहाँ तक पहुँचने के लिए सत्रह दिन लगते हैं।आत्मा अगले ग्यारह महीने के लिए यमलोक के माध्यम से यात्रा करते हुए बारहवें महीने में यह यमलोक की अदालत तक पहुँचति है । इस ग्यारह महीने की अवधि के दौरान आत्मा को भोजन और पानी उपलब्ध नहीं होता है। इसलिए बेटे और परिवार के सदस्यों के द्वारा किया पिंडदान और तर्पण से आत्मा की प्यास और भुख को संतुष्ट किया जाता है।हिंदू धर्म के अनुसार श्राद्व अनुष्ठान 3  तरह से ...

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Maa Kamakhya Jyotish

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फाल्गुनी मास शुक्ला पक्ष एकादशी प्रातः दैनिक कार्य से निवृत हो के स्नानआदि करने के पश्चात हाथ मे जल लेकर सच्ची श्रधा के साथ 108 बार मन्त्र का ऊचरन करें :-

                     द्वादशयाम् तु निराहार: स्थित्वहमपरेअहनी |
                     भोक्शयामी जामदग्न्येश शरणं मे भ्वाच्युत||

             इस मन्त्र के साथ व्रत को प्रारंभ करें | और फिर आँवला के पेड़ के नीचे कलश स्थापित करें और उसी पेर तांबे या फिर बाँस के बर्तन मे खीर डालकर रखें| और उसमें पन्चधातु से बनी हुई भगवान परशुराम की मूर्ति रखकर मूर्ति को पंचमृत से स्नान कराकर पूजन करें और मंत्र का उचरण करें : -
                     क्षत्रांतकरण घोरमुद्वह्न परशु करे|
                     जामदग्न्य प्रकर्तवो रामो रोषारूणेक्षण||
        'पाद्योर्विशोकाय', 'जान्वो: सर्वरूपीणे', 'नासिकायाँ शोकनाशाय', 'भ्रुवो रामाय', 'ललाटे वामनाय', आदि उचारणो और नाम मंत्रो के द्वारा पूजा करें | 
              इस कलियुग मे मनुष्य अपने कार्य सिधि, मनलोलुप्ता, स्वार्थ को सीध करने के लिए एक दूसरे के प्रति हिन भावना रखते हैं, और एक दूसरे से द्वेष की भावना रखते हुए एक दूसरे को हानि पहुचाते हुए पाप के भागी बनते है, ब्रह्मांडपुराण के मतानुसार पापनाशिनी द्वादशी के द्वारा मनुष्य अपने पापों से मुक्ति पाने का मार्ग मिल सकता है  

पंडित बी. डी. शाश्त्री (माँ कामख्या देवी उपासक ओर तंत्र मंत्र के प्रसिध ज्योतिष)

समस्याओ के समाधान/निराकरण के लिए सम्पर्क इन नंबर +91 9099976861 पर या mkjyotish@gmail.com मेल.कर सकते है |

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Mahashivratri is Lord Shiva's most beloved day of the year

Without a doubt, the sacred event of Maha Shivratri stays a standout amongst the most significant celebrations for every one of the devotees of Lord Shiva. It is trusted that whoever reveres Lord Shiva on this blessed day with complete severity and commitment is mitigated of all transgressions and accomplishes freedom or moksha. In Hindu mythology, Kaal ratri, Mohratri and Shivaratri are viewed as the three most auspicious days for worship. As Lord Shiva is connected with the welfare of the creation, performing the customs of Maha Shivaratri reclaims one from the indecencies of desire, insatiability, and outrage and leads him to an existence of satisfaction, peace and thriving.

Shivaratri is extraordinary celebration for convergence of Shiva and Shakti. Chaturdashi Tithi amid Krishna Paksha in month of Magha is known as Maha Shivaratri as indicated by South Indian date-calender. However, as indicated by North Indian calender Masik Shivaratri in month of Phalguna is known as Maha Shivaratri. It is naming tradition of lunar month which contrasts. However both, North Indians and South Indians, observe Maha Shivaratri on same day.

What is exceptional about Mahashivratri night?

Masik Shivratri and monthly shivratri is usually observed at every month of the year. On the Chaturdashi night of Phalgun month, the tamoguna or negative energies are at their top. Subsequently, Maha Shivratri is watched and Lord Shiva is adored to annihilate the unfriendly impacts of tamas (negative strengths) all around and set up a tranquil and sound air for every one of us.

Significance of Shivratri in indian culture

Celebration of Mahashivaratri is the most essential celebration for a large number of devotees of Lord Shiva. The celebration has been concurred part of importance in Hindu mythology. According to  that a devotee who performs true worship of Lord Shiva on the favorable day of Shivratri is acquitted of sins and accomplishes moksha.

Centrality of Shivaratri for Women

Mahashivratri Festival is likewise thought to be a significant festival by women. Unmarried and married women observe and perform Shiva Puja with trueness to assuage Goddess Parvati who is additionally viewed as "Gaura" - one who gives conjugal happiness and long and prosperous wedded life. Unmarried women likewise pray God for a spouse such as Lord Shiva who is viewed as the perfect spouse.

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माँ महागौरी - माँ दुर्गा का आठवां सवरूप

माँ महागौरी - माँ दुर्गा का आठवां सवरूप है जो की सुख, शांति, धन, वैभव की प्रतीक मानी जाती है |  नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है क्योंकि मां की उत्पत्ति के समय इनकी आयु आठ वर्ष की थी जिस कारण इनका पूजन अष्टमी को कि जाती  है। कहते हे अगर सच्चे तन ओर मन से अगर मां की स्तुति की जाये तो समस्त पापों का नाश होता है तथा सुख, शांति, धन, वैभव  प्राप्ति  होती है । माँ  दुर्गा  के आठवें स्वरूप महागौरी माँ का प्रसिद्ध पीठ हरिद्वार के समीप कनखल नामक स्थान पर है।

 

माँ महागौरी के रुप में दुर्गा जी का स्वरुप

माँ महागौरी के शरीर बहुत गोरा है। देवी महागौरी के वस्त्र और अभुषण श्वेत होने के कारण उन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहा गया है। माँ महागौरी की चार भुजाएं है जिनमें से उनके दो हाथों में डमरु और त्रिशुल है तथा अन्य दो हाथों अभय और वर मुद्रा में है। इनका वाहन गाय है।

 

माँ महागौरी नाम की उत्पत्ति की कथा

ऐसा माना जाता हे कि भगवान शिव को पाने के लिए किये गए अपने कठोर तप के कारण माँ पार्वती का रंग काला और शरीर क्षीण हो गया था, तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने माँ पार्वती के शरीर को गंगा के जल से धोया तो वह शंख और चन्द्र के समान अत्यंत श्वेत वर्ण के समान गौरी हो गई । इसी कारण माँ  दुर्गा को "महागौरी" के नाम से भी जाना जाता  हैं।

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या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

                                                                                                  

 

कालरात्रि - माँ दुर्गा का सातवां सवरूप है जो की वीरता ओर साहस का प्रतीक मानी जाती है |

मां का यह बडा ही विकराल सवरूप है कहते हैं दुष्टों का नाश करने के लिए माँ ने यह भयानक रूप धारण किया है। माँ कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली हैं। इससे भक्तों को किसी प्रकार भी भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है। नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। माँ कालरात्रि सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इस कारण माँ का नाम 'शुभंकारी' भी है। माँ कालरात्रि की कृपा से भक्त सर्वथा भय-मुक्त रहता है। नवरात्रा सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा को माँ दूर्गा की सबसे बड़ी पूजा में से एक माना जाता है। ऎसी मान्यता है कि माँ कालरात्रि की पूजा करने से ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है तथा मनुष्य समस्त सिद्धियों(काला जादू) एवं शक्तियां को प्राप्त कर लेता है। इसलिए इस दिन ज्योतिष /अघोरी विशेष रूप से तंत्र मंत्र की सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए माँ कालरात्रि की पूजा करता है। मां की भक्ति से दुष्टों का नाश होता है और ग्रह बाधाएं दूर हो जाती हैं। माँ कालरात्रि के उपासकों को अग्नि-भय, जल-भय, शत्रु-भय, रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते।

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हिंदू धर्म के अनुसार पितृ( पूर्वजों ) को श्रद्धांजलि अर्पित के लिए कि गयी पूजा या अनुष्ठान को श्राद्व कहते है । जो व्याक्ति जिस तिथि को देह त्याग देता हैं, उस तिथि को हर वर्ष यह श्राध्द किया जाता है।  हिन्दू धर्म में श्राद्ध पक्ष के लिए 16 दिन निर्धारित किए गए हैं ताकि आप अपने पूर्वजों को याद करें और उनको श्रद्धांजलि अर्पित करवा कर उन्हे शांति प्रदान करें, ऐसा करने से आपको उनका आर्शीवाद आप पर सदेव रहेगा और घर में सुख़ और शान्ति हमेशा बनी रहेगी  । जिस घर परिवार के पितर खुश रहते हैं उसमें कभी भी किसी प्रकार का कष्ट नहीं आता।

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जातक के जन्म कुंडली के नौवे स्थान को भाग्य कहा गया है . इसके साथ ही यह स्थान पित्र या पितृ या पिता तथा पूर्वजों का स्थान होने के कारण भी विशेष रुप से महत्वपूर्ण हो जाता है. जातक के जन्म कुंडली के नौवे स्थान में जब सूर्य तथा राहू एक साथ पाये जाते है तो जातक पितृ दोष का भागीदार होता है ।

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Match Making(Gune Milan): Pandit N L Swami (Gold Medalist) is one of world famous astrologer who is expert in Match Making.

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Sani Sade sati effect: Get Solution of Sani Sade sati effect by expert Pt. N.L. Swami.

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Gemstone Consultation : Get to know about your grahas and related gemstone by expert astrologer Pt. N.L. Swami.

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