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कैसे करें पापों का नाश (पापनाशिनी द्वादशी) :

फाल्गुनी मास शुक्ला पक्ष एकादशी प्रातः दैनिक कार्य से निवृत हो के स्नानआदि करने के पश्चात हाथ मे जल लेकर सच्ची श्रधा के साथ 108 बार मन्त्र का ऊचरन करें :-

                     द्वादशयाम् तु निराहार: स्थित्वहमपरेअहनी |
                     भोक्शयामी जामदग्न्येश शरणं मे भ्वाच्युत||

             इस मन्त्र के साथ व्रत को प्रारंभ करें | और फिर आँवला के पेड़ के नीचे कलश स्थापित करें और उसी पेर तांबे या फिर बाँस के बर्तन मे खीर डालकर रखें| और उसमें पन्चधातु से बनी हुई भगवान परशुराम की मूर्ति रखकर मूर्ति को पंचमृत से स्नान कराकर पूजन करें और मंत्र का उचरण करें : -
                     क्षत्रांतकरण घोरमुद्वह्न परशु करे|
                     जामदग्न्य प्रकर्तवो रामो रोषारूणेक्षण||
        'पाद्योर्विशोकाय', 'जान्वो: सर्वरूपीणे', 'नासिकायाँ शोकनाशाय', 'भ्रुवो रामाय', 'ललाटे वामनाय', आदि उचारणो और नाम मंत्रो के द्वारा पूजा करें | 
              इस कलियुग मे मनुष्य अपने कार्य सिधि, मनलोलुप्ता, स्वार्थ को सीध करने के लिए एक दूसरे के प्रति हिन भावना रखते हैं, और एक दूसरे से द्वेष की भावना रखते हुए एक दूसरे को हानि पहुचाते हुए पाप के भागी बनते है, ब्रह्मांडपुराण के मतानुसार पापनाशिनी द्वादशी के द्वारा मनुष्य अपने पापों से मुक्ति पाने का मार्ग मिल सकता है  

पंडित बी. डी. शाश्त्री (माँ कामख्या देवी उपासक ओर तंत्र मंत्र के प्रसिध ज्योतिष)

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Guest Monday, 23 October 2017

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