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श्राद्व क्या है? क्यूों किया जाता है ?

हिंदू धर्म के अनुसार पितृ( पूर्वजों ) को श्रद्धांजलि अर्पित के लिए कि गयी पूजा या अनुष्ठान को श्राद्व कहते है । जो व्याक्ति जिस तिथि को देह त्याग देता हैं, उस तिथि को हर वर्ष यह श्राध्द किया जाता है।  हिन्दू धर्म में श्राद्ध पक्ष के लिए 16 दिन निर्धारित किए गए हैं ताकि आप अपने पूर्वजों को याद करें और उनको श्रद्धांजलि अर्पित करवा कर उन्हे शांति प्रदान करें, ऐसा करने से आपको उनका आर्शीवाद आप पर सदेव रहेगा और घर में सुख़ और शान्ति हमेशा बनी रहेगी  । जिस घर परिवार के पितर खुश रहते हैं उसमें कभी भी किसी प्रकार का कष्ट नहीं आता।



गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा मृत्यु के तेरह दिन बाद यमलोक के लिए अपनी यात्रा शुरू होती है और यह वहाँ तक पहुँचने के लिए सत्रह दिन लगते हैं।
आत्मा अगले ग्यारह महीने के लिए यमलोक के माध्यम से यात्रा करते हुए बारहवें महीने में यह यमलोक की अदालत तक पहुँचति है । इस ग्यारह महीने की अवधि के दौरान आत्मा को भोजन और पानी उपलब्ध नहीं होता है। इसलिए बेटे और परिवार के सदस्यों के द्वारा किया पिंडदान और तर्पण से आत्मा की प्यास और भुख को संतुष्ट किया जाता है।



हिंदू धर्म के अनुसार श्राद्व अनुष्ठान 3  तरह से कर सकते है ।

१. पिंडदान - पूर्वजों को पिंड के रूप में चावल,गाय का दूध, घी, चीनी और शहद, पूर्वजों को भेंट करने की प्रक्रिया को पिंडदान कहते है।

२. तर्पण - पानी को  काले तिल (तिल), जौ (जौं), Kusha घास (कुशा) और सफेद flours के साथ मिश्रित कर भेंट करने की प्रक्रिया को तर्पण कहते  है । यह पूर्वजों तर्पण की प्रक्रिया से संतुष्ट कर रहे हैं कि माना जाता है।

३. कौवे एवम ब्राह्मण को भोजन खिलाना ।


पंडित N.L स्वामी जी, तांत्रिक विधि विधान में जानेमाने विख्यात ज्योतिषी है । अगर किसी जातक को श्राद्व, पिंडदान बारे में जानना या करवाना चाहता है तो   वह पंडित N.L स्वामी जी से +91 9099976861  या mkjyotish@gmail.com पर सम्पर्क केर सकते है ।


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Comments

  • Guest
    abhishek Tuesday, 29 September 2015

    excellent information

  • Guest
    ashish Tuesday, 06 October 2015

    excellent information. thanks

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Guest Monday, 23 October 2017

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